उत्तराखंड में लिंगानुपात को सुधारने और पीसीपीएनडीटी (PCPNDT) एक्ट के कड़े अनुपालन को लेकर प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में है। इसी क्रम में रानीखेत के विभिन्न सरकारी और निजी अस्पतालों में संचालित अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर टीम ने औचक धावा बोला। इस अचानक हुई कार्रवाई से अस्पताल संचालकों और निजी क्लीनिकों में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।
अभिलेखों की हुई बारीकी से जांच
संयुक्त टीम ने नगर के गोविंद सिंह माहरा राजकीय चिकित्सालय सहित एस.एन. हॉस्पिटल, डॉ. बंगारी क्लीनिक और अन्य निजी केंद्रों का सघन निरीक्षण किया। जांच के दौरान अधिकारियों ने विशेष रूप से:
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एफ-फॉर्म (F-Forms): मरीजों के डेटा और भरे गए फॉर्म्स का मिलान किया।
ट्रैकिंग डिवाइस: अल्ट्रासाउंड मशीनों में लगी ट्रैकिंग डिवाइस और एक्टिव ओपीडी रजिस्टर को खंगाला। -
मानकों की पड़ताल: यह सुनिश्चित किया गया कि कहीं भी नियम विरुद्ध लिंग चयन या कन्या भ्रूण हत्या जैसी गतिविधियों को बढ़ावा तो नहीं दिया जा रहा।
नियमों की अनदेखी पर दी कड़ी चेतावनी
हालांकि इस छापेमारी के दौरान रानीखेत के अधिकतर केंद्रों पर व्यवस्थाएं संतोषजनक पाई गईं, लेकिन प्रशासन ने संचालकों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या दस्तावेजों में हेरफेर पाए जाने पर सीधे मशीन सील कर दी जाएगी और लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा।
निरीक्षण टीम में डॉ. अमरजीत सिंह, नायब तहसीलदार राजेंद्र सिंह अधिकारी, जिला कार्यक्रम प्रबंधक (एनएचएम) दीपक भट्ट, ग्रास संस्था की संध्या साह तथा , पीसीपीएनडीटी के डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटर धीरज शाह शामिल रहे।
पड़ोसी जिलों में हो चुकी है बड़ी कार्रवाई
ज्ञात हो कि हाल ही में रुद्रपुर और किच्छा क्षेत्र में भी इसी तरह की छापेमारी हुई थी, जहाँ रेडियोलॉजिस्ट की अनुपस्थिति और दस्तावेजों में कमी के चलते 7 अल्ट्रासाउंड मशीनों को सील किया गया था। उसी तर्ज पर अब रानीखेत प्रशासन भी सतर्क है।
“हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चिकित्सा सेवाएं मानकों के अनुसार मिलें। लिंग निर्धारण एक गंभीर अपराध है और पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।”
— जांच टीम के वरिष्ठ अधिकारी