
सुयालबाड़ी।नैनीताल जिले के सुयालबाड़ी क्षेत्र के ग्राम सभा सिरसा अंतर्गत चोनीखेत में मंगलवार सुबह एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। घर के आंगन के पास बैठी 13 वर्षीय बालिका पर एक गुलदार ने हमला करने की कोशिश की, लेकिन बालिका की अद्भुत सूझबूझ और साहस के आगे खूंखार गुलदार भी पीछे हटने को मजबूर हो गया।
जानकारी के अनुसार, पूर्व प्रधान एवं वरिष्ठ पत्रकार अनूप सिंह जीना की पुत्री मिताली जीना (ममता) सुबह करीब 9:30 बजे अपने घर के पीछे बैठी हुई थी। इसी दौरान घात लगाए बैठे एक विशालकाय गुलदार ने अचानक उसकी ओर बढ़ना शुरू कर दिया। खतरे को भांपते हुए मिताली ने घबराने के बजाय जोर-जोर से चिल्लाना शुरू कर दिया और पास पड़े पत्थरों को उठाकर गुलदार पर फेंकने लगी।
बालिका के इस अप्रत्याशित प्रतिरोध से गुलदार सहम गया और उसने अपना इरादा बदल दिया। हालांकि, जाते-जाते उसने पास में बंधी एक बकरी को अपना शिकार बना लिया और जंगल की ओर भाग निकला। ग्रामीणों का मानना है कि यदि मिताली ने साहस और सूझबूझ का परिचय नहीं दिया होता, तो बड़ा हादसा हो सकता था।
घटना के बाद मचा हड़कंप
घटना की सूचना मिलते ही पूरे क्षेत्र में दहशत फैल गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पूर्व प्रधान अनूप सिंह जीना ने ग्राम प्रधान सिरसा भुवन चन्द्र और वन क्षेत्राधिकारी (आरएफओ) विजय भट्ट को तुरंत जानकारी दी।
सूचना मिलते ही फोरेस्टर संजय टम्टा के नेतृत्व में वन विभाग की टीम घटनास्थल पर पहुंची। ग्राम प्रधान, वन विभाग के कर्मचारियों और ग्रामीणों ने संयुक्त रूप से क्षेत्र में सर्च अभियान चलाकर गुलदार की तलाश की। बाद में वन विभाग की निगरानी में मृत बकरी के अवशेषों को गड्ढे में दबाकर आवश्यक कानूनी कार्रवाई पूरी की गई।
ग्रामीणों में भय, पिंजरा लगाने की मांग
दिनदहाड़े आबादी वाले क्षेत्र में गुलदार के पहुंचने से ग्रामीणों में भारी आक्रोश और भय का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि अब वन्यजीवों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है और वे बेखौफ होकर आबादी वाले इलाकों में प्रवेश कर रहे हैं।
ग्राम प्रधान भुवन चन्द्र ने वन विभाग से क्षेत्र में तत्काल पिंजरा लगाने तथा गुलदार को पकड़ने की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी बड़ी घटना को रोका जा सके।
वन विभाग ने बढ़ाई निगरानी
वन विभाग ने प्रभावित क्षेत्र में कैमरा ट्रैप लगाने, गश्त बढ़ाने और स्थिति पर लगातार नजर रखने का आश्वासन दिया है। विभाग ने ग्रामीणों से सुबह-शाम अकेले सुनसान रास्तों पर न जाने, बच्चों और मवेशियों को अकेला न छोड़ने तथा किसी भी वन्यजीव की गतिविधि की तत्काल सूचना देने की अपील की है।
बहादुरी की मिसाल बनी मिताली
इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में 13 वर्षीय मिताली जीना की बहादुरी की चर्चा हो रही है। मौत को सामने देखकर भी जिस साहस और समझदारी का परिचय उसने दिया, वह न केवल उसकी जान बचाने में सफल रहा बल्कि पूरे गांव को एक संभावित बड़ी त्रासदी से भी बचा गया।