
अल्मोड़ा। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘प्रधानमंत्री टीबी मुक्त अभियान’ की जमीनी हकीकत उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में चिंताजनक तस्वीर पेश कर रही है। अल्मोड़ा जिले के भैंसियाछाना विकासखंड के कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में टीबी जांच और उपचार की सुविधाएं न होने से ग्रामीण मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस गंभीर मुद्दे को लेकर जिला पंचायत सदस्य शैलजा चम्पाल ने जिलाधिकारी अल्मोड़ा को पत्र सौंपकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
जिला पंचायत क्षेत्र-44 सल्ला भाटकोट की सदस्य शैलजा चम्पाल ने अपने पत्र में बताया कि भैंसियाछाना, कनारीछीना, धौलछीना और सेराघाट जैसे प्रमुख ग्रामीण क्षेत्रों के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में टीबी जांच के लिए न तो आधुनिक मशीनें उपलब्ध हैं और न ही प्रशिक्षित तकनीशियन एवं आवश्यक चिकित्सा स्टाफ की तैनाती की गई है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 से देशभर में टीबी उन्मूलन को लेकर बड़े स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन इन पर्वतीय क्षेत्रों में मरीजों को आज भी बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। हालात ऐसे हैं कि टीबी की जांच और सामान्य उपचार के लिए मरीजों को 70 से 80 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय अल्मोड़ा जाना पड़ता है।
गरीब मरीजों पर दोहरी मार
पहाड़ी क्षेत्रों के दुर्गम रास्तों पर लंबी यात्रा करना मरीजों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। एक ओर बीमारी का दर्द, दूसरी ओर बार-बार अस्पताल पहुंचने का आर्थिक बोझ गरीब परिवारों की कमर तोड़ रहा है। कई मरीज किराया और अन्य खर्च वहन न कर पाने के कारण समय पर जांच और उपचार नहीं करा पाते, जिससे बीमारी के फैलने का खतरा और बढ़ जाता है।
स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली पर उठे सवाल
शैलजा चम्पाल ने जिलाधिकारी से मांग की है कि क्षेत्र के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में शीघ्र टीबी जांच मशीनें स्थापित की जाएं तथा आवश्यक चिकित्सा कर्मियों की तैनाती सुनिश्चित की जाए, ताकि ग्रामीणों को अपने क्षेत्र में ही उपचार की सुविधा मिल सके।
इस मामले ने एक बार फिर पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति और केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं तो टीबी जैसी गंभीर बीमारी से लड़ने का सरकारी अभियान केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएगा।