डेढ़ महीने से दहशत का पर्याय बना आदमखोर बाघ आखिर पकड़ में, कॉर्बेट भेजा गया

                                                       

तड़म गांव में दो लोगों की जान लेने वाले बाघ का सफल रेस्क्यू, ग्रामीणों ने ली राहत की सांस

सल्ट/अल्मोड़ा। जनपद के मोहान वन प्रभाग की कैमोरिया बीट अंतर्गत तड़म गांव में पिछले डेढ़ महीने से दहशत फैला रहे बाघ को आखिरकार वन विभाग ने पकड़ लिया। दो ग्रामीणों की जान लेने वाले इस बाघ के सफल रेस्क्यू के बाद पूरे क्षेत्र में राहत का माहौल है। वन विभाग ने बाघ को स्वास्थ्य परीक्षण के बाद कॉर्बेट टाइगर रिजर्व भेज दिया है।

उप प्रभागीय वनाधिकारी काकुल पुंडीर ने बताया कि 31 मार्च 2026 को हुई पहली घटना के बाद से ही वन विभाग लगातार इलाके में निगरानी और रेस्क्यू अभियान चला रहा था। बाघ की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए ड्रोन, ट्रैप कैमरे और लगातार गश्त का सहारा लिया गया। ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए विशेष सुरक्षा उपकरण भी लगाए गए थे।

वन विभाग की टीम ने दिन-रात जंगल में सर्च ऑपरेशन, ट्रैकिंग और रात्रिकालीन गश्त जारी रखी। अभियान में कॉर्बेट टाइगर रिजर्व और नैनीताल चिड़ियाघर की विशेषज्ञ टीमों का भी सहयोग लिया गया। कई बार बाघ को ट्रैंकुलाइज करने का प्रयास किया गया, लेकिन घने जंगल और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के चलते सफलता नहीं मिल पा रही थी।

सोमवार सुबह करीब 9 बजे वन विभाग की संयुक्त टीम को बड़ी सफलता मिली और बाघ को सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू कर लिया गया। स्वास्थ्य परीक्षण में बाघ पूरी तरह स्वस्थ पाया गया, जिसके बाद उसे कॉर्बेट टाइगर रिजर्व भेज दिया गया।

बाघ के पकड़े जाने के बाद तड़म गांव समेत आसपास के क्षेत्रों के लोगों ने राहत की सांस ली है। लंबे समय से ग्रामीण भय के साये में जीवन बिताने को मजबूर थे। वन विभाग की इस कार्रवाई को बड़ी कामयाबी माना जा रहा है।

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