“महंगाई में टूटा सब्र, अब 805 रुपये दिहाड़ी की जंग” — रानीखेत छावनी परिषद के आउटसोर्स कर्मियों का हल्लाबोल

                                                         

रानीखेत। रानीखेत छावनी परिषद में वर्षों से सेवाएं दे रहे आउटसोर्स कर्मचारियों का सब्र अब जवाब देने लगा है। महंगाई और कम मानदेय से परेशान कर्मचारियों ने सोमवार को अपने हकों के लिए जोरदार आवाज बुलंद करते हुए भारत सरकार की नई संशोधित वेतन दरें तत्काल लागू करने की मांग की। कर्मचारियों ने मुख्य अधिशासी अधिकारी (सीईओ) को संबोधित ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारी को सौंपकर साफ चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं सामाजिक न्याय आयोग के बैनर तले आयोजित इस प्रदर्शन का नेतृत्व जिला अध्यक्ष जगदीश ने किया। भारी संख्या में कर्मचारी छावनी परिषद कार्यालय पहुंचे और अपनी आर्थिक व प्रशासनिक समस्याओं को प्रशासन के सामने रखा। कर्मचारियों ने कहा कि वे पूरी ईमानदारी और निष्ठा से काम कर रहे हैं, लेकिन वर्तमान महंगाई के दौर में मिलने वाला कम मानदेय उनके परिवार का गुजारा चलाने के लिए नाकाफी साबित हो रहा है।

ज्ञापन में कर्मचारियों ने भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय) कार्यालय, नई दिल्ली द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एस.ओ. 190 (ई) का हवाला देते हुए कहा कि 6 फरवरी 2026 को जारी नई गाइडलाइन के तहत आउटसोर्स कर्मचारियों की वेतन दरों में संशोधन किया गया है। अधिसूचना में मूल्य सूचकांक के आधार पर वेतन वृद्धि का प्रावधान किया गया है, जिसे कई सरकारी संस्थानों में लागू भी किया जा चुका है।

कर्मचारियों ने उत्तराखंड की राजधानी देहरादून नगर निगम का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां 29 अप्रैल 2026 की बोर्ड बैठक में आउटसोर्स कर्मचारियों को ₹805 प्रतिदिन की दर से वेतन देने का प्रस्ताव पास किया जा चुका है। इसी आधार पर रानीखेत छावनी परिषद के कर्मचारियों ने भी समान वेतनमान लागू करने की मांग रखी।

प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों में जबरदस्त एकजुटता देखने को मिली। इस मौके पर नीरज कुमार, वीरू, आशीष कुमार, अशोक कुमार, अर्जुन, बंटी, पुष्पेंद्र, कमल रावत, जुगल किशोर, सुनीता, रजनी, सोनम, राहुल, सुकेश कुमार और राशि सहित दर्जनों कर्मचारी मौजूद रहे।

कर्मचारियों ने दो टूक कहा कि उनकी मांग पूरी तरह जायज है और यदि जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो वे आंदोलन को और उग्र करने के लिए बाध्य होंगे।

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