अल्मोड़ा। पिछले दिनों हुई बारिश के बाद शहर में कई क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति ठप होने से लोगों की परेशानी बढ़ गई। इसी मुद्दे को लेकर शुक्रवार को उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) के कार्यकर्ताओं ने जल संस्थान के अधिशासी अभियंता (ईई) कार्यालय का घेराव किया और जोरदार प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने कार्यालय परिसर में सांकेतिक धरना देकर विभाग के खिलाफ नारेबाजी की।
उक्रांद नेताओं ने आरोप लगाया कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद जलापूर्ति व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। उनका कहना था कि वर्ष 2024-25 में जिला योजना से लगभग 13 करोड़ रुपये और वर्ष 2025-26 में करीब 12 करोड़ रुपये जल संस्थान को आवंटित किए गए। इसके अलावा रखरखाव के लिए 3.11 करोड़ रुपये भी दिए गए, लेकिन मानसून की शुरुआती हल्की बारिश में ही शहर पानी के संकट से जूझने लगा।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि करोड़ों रुपये की लागत से लगाए गए फिल्टर पंपों के बावजूद लोगों को गंदा और मटमैला पानी मिल रहा है। उन्होंने विभाग पर धनराशि के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की जांच की मांग की।
उक्रांद नेताओं ने जल संस्थान के अधिशासी अभियंता को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि भविष्य में कोसी नदी में सिल्ट का बहाना बनाकर शहर की पेयजल आपूर्ति बाधित की गई, तो उक्रांद स्वयं ईई के घर की पेयजल लाइन काटने के लिए मजबूर होगा।
इस दौरान उक्रांद ने हर घर में पानी के मीटर लगाने और मीटर रीडिंग के आधार पर ही जल बिल जारी करने की मांग भी उठाई।
प्रदर्शन में उक्रांद के जिलाध्यक्ष दिनेश जोशी, केंद्रीय संयुक्त सचिव त्रिलोक लटवाल, विनय किरौला, कार्यकारी अध्यक्ष पान सिंह लटवाल, छात्र इकाई यूएसएफ के अध्यक्ष अभिषेक बनौला, कार्यालय प्रबंधक जगदीश जोशी, जिला मंत्री केदार बिष्ट, जिला महामंत्री देवेश जोशी, सुजीत टम्टा, अक्षय टम्टा, मोहित साह सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।