रानीखेत उपमंडल में अग्निशमन व्यवस्था गंभीर चुनौतियों से जूझ रही है। यहां एकमात्र अग्निशमन केंद्र पर सल्ट, चौखुटिया, द्वाराहाट, भिकियासैंण, स्याल्दे और रानीखेत सहित छह तहसीलों की जिम्मेदारी है। राज्य गठन के बाद भले ही नई तहसीलों का निर्माण हुआ हो, लेकिन आग से निपटने के लिए आवश्यक अग्निशमन केंद्रों की स्थापना अब तक नहीं हो पाई है।
इसका खामियाजा दमकल कर्मियों के साथ-साथ स्थानीय लोगों को भी भुगतना पड़ रहा है। खासतौर पर सल्ट जैसे दुर्गम क्षेत्रों में आग बुझाने या राहत-बचाव कार्य के लिए दमकल टीम को रानीखेत से लगभग चार घंटे का लंबा सफर तय करना पड़ता है। इस देरी के कारण कई बार हालात बेकाबू हो जाते हैं और नुकसान बढ़ जाता है।
पिछले कुछ वर्षों में वनाग्नि की घटनाओं में तेजी से इजाफा हुआ है। इसके अलावा अन्य आगजनी की घटनाएं भी लगातार सामने आती रहती हैं। बावजूद इसके, उपमंडल की अन्य तहसीलों में नए अग्निशमन केंद्र स्थापित नहीं किए गए हैं, जिससे समस्या और विकराल होती जा रही है।
आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष अब तक दमकल कर्मियों ने 20 से अधिक घटनाओं पर काबू पाया है। मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए क्षेत्र में कम से कम दो से तीन अतिरिक्त अग्निशमन केंद्रों की आवश्यकता महसूस की जा रही है, ताकि समय रहते आग पर नियंत्रण पाया जा सके और जन-धन के नुकसान को कम किया जा सके।
स्थानीय लोगों और प्रशासनिक सूत्रों का मानना है कि यदि जल्द ही इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में स्थिति और गंभीर हो सकती है।