भक्ति, सेवा और श्रद्धा से गूंजा मंदिर परिसर, देर रात तक चलता रहा महाप्रसाद वितरण
माँ नंदा-सुनंदा मंदिर में सोमवार को गंगा दशहरा के पावन अवसर पर भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। मंदिर परिसर में वार्षिक उत्सव के तहत विशाल महाभंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर माँ का आशीर्वाद प्राप्त किया। पिछले 22 वर्षों से चली आ रही यह परंपरा इस वर्ष भी पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ निभाई गई।
सुबह से ही मंदिर में धार्मिक अनुष्ठानों का दौर शुरू हो गया था। आयोजन समिति और स्थानीय श्रद्धालुओं ने विशेष पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की। इस दौरान वैदिक मंत्रोच्चार और गंगा स्तोत्र पाठ से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। दिनभर श्रद्धालुओं का मंदिर में दर्शन के लिए आना-जाना लगा रहा।
शाम 7 बजे शुरू हुआ विशाल भंडारा
हर वर्ष की भांति इस बार भी शाम ठीक 7 बजे से महाप्रसाद वितरण शुरू किया गया। मंदिर पहुंचे सभी श्रद्धालुओं को स्वयंसेवकों द्वारा ससम्मान प्रसाद ग्रहण कराया गया। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बावजूद व्यवस्थाएं सुचारू रूप से संचालित की गईं। भंडारा देर रात तक चलता रहा और भक्तों ने श्रद्धा भाव से प्रसाद ग्रहण किया।
गंगा दशहरा का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को माँ गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था। राजा भागीरथ की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर माँ गंगा स्वर्ग से धरती पर आई थीं। शास्त्रों में ‘दशहरा’ का अर्थ दस प्रकार के पापों का नाश बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान, दान और पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति के दस पाप नष्ट हो जाते हैं तथा सुख-समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
स्थानीय लोगों का रहा विशेष सहयोग
इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में स्थानीय जनता, व्यापारियों और आयोजन समिति के सदस्यों का विशेष योगदान रहा। आयोजन में हरीश लाल साह, अगस्त लाल साह, अनिल वर्मा, किरण साह, विपिन चौधरी, ललित साह, पंकज साह, यतीश रौतेला, अंशुल साह, सौरभ अग्रवाल, अमित रावत, भुवन सती सहित कई श्रद्धालुओं और सेवादारों ने देर रात तक व्यवस्थाएं संभालीं।
मंदिर परिसर दिनभर माँ नंदा-सुनंदा के जयकारों से गूंजता रहा और पूरे नगर में भक्तिमय वातावरण बना रहा।
