एक माह में पूरे होंगे लंबित गौशाला निर्माण कार्य, हर क्षेत्र में तैयार होंगे 25 ग्राम गौसेवक
अल्मोड़ा। उत्तराखंड गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष डॉ. पंडित राजेंद्र प्रसाद अणथवाल ने बुधवार को कलेक्ट्रेट सभागार, अल्मोड़ा में जनपद में संचालित निराश्रित गौकल्याण कार्यक्रमों की समीक्षा बैठक की। बैठक में गौशालाओं की स्थिति, गोवंश संरक्षण, टैगिंग व्यवस्था और गौसेवकों की समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
अध्यक्ष ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि गोवंश को “आवारा” न कहकर “निराश्रित गोवंश” अथवा “नंदी बाबा” कहा जाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री द्वारा गोवंश संरक्षण एवं संवर्धन को प्राथमिकता दी जा रही है और इस दिशा में लगातार कार्य किए जा रहे हैं।
बैठक में गौसेवकों ने पानी की कमी, गौशालाओं के विस्तार में देरी और भूसा-चारे में आग लगाने जैसी घटनाओं की जानकारी दी। इस पर अध्यक्ष ने सीमावर्ती क्षेत्रों में सघन चेकिंग करने और पशु तस्करी पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि “ऑपरेशन कामधेनु” के तहत टैगिंग के माध्यम से निराश्रित पशुओं की निगरानी की जा रही है और इसमें पुलिस व नगर निकायों के साथ बेहतर समन्वय जरूरी है।
मासी क्षेत्र में गौशाला के पास आगजनी की घटनाओं पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने तत्काल प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। साथ ही गौसेवकों के साथ नियमित समन्वय बैठक आयोजित करने और पशु चिकित्सा अधिकारी को नोडल अधिकारी बनाने को कहा।
डॉ. अणथवाल ने लंबे समय से लंबित गौशाला निर्माण कार्यों पर नाराजगी व्यक्त करते हुए उन्हें एक माह के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी गौशालाओं को लिफ्टिंग मशीन उपलब्ध कराई जाएगी। यह सुविधा जिला पंचायत, नगर पंचायत, नगर निगम और नगर पालिकाओं को भी दी जाएगी।
उन्होंने गौशालाओं में सीसीटीवी और जीपीएस लगाने, बायोगैस, गोमूत्र और गोबर से उत्पाद निर्माण को बढ़ावा देने तथा केंचुआ खाद निर्माण के जरिए आत्मनिर्भरता की दिशा में कार्य करने पर जोर दिया।
बैठक में गोवंश टैगिंग की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए गए कि टैगिंग के साथ गोपालक का फोटो भी जोड़ा जाए। वर्ष 2026 तक प्रत्येक क्षेत्र में 25 ग्राम गौसेवक तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। पशु चिकित्सकों को गांव-गांव जाकर योजनाओं की जानकारी देने के निर्देश भी दिए गए।
अध्यक्ष ने गोवंश के जन्म और मृत्यु का सही अभिलेखीकरण करने तथा नियमित स्वास्थ्य जांच सुनिश्चित करने को भी कहा।
बैठक में आयोग सदस्य दया कृष्ण कांडपाल, लक्ष्मण सिंह, जिला विकास अधिकारी संतोष कुमार पंत, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. योगेश अग्रवाल सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
प्रमुख बिंदु
- “आवारा” की जगह “निराश्रित गोवंश” या “नंदी बाबा” शब्द के प्रयोग पर जोर
- एक माह में लंबित गौशाला निर्माण कार्य पूरे करने के निर्देश
- हर क्षेत्र में 25 ग्राम गौसेवक तैयार करने का लक्ष्य
- गौशालाओं में सीसीटीवी और जीपीएस लगाने के निर्देश
- टैगिंग के साथ गोपालक का फोटो जोड़ना अनिवार्य
- पशु तस्करी रोकने के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में सघन चेकिंग
- गोबर, गोमूत्र और बायोगैस से आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर जोर
