पलायन से जूझते पहाड़ में ‘म्यूजिकल विलेज फेस्टिवल’ बना नई उम्मीद, पोखरी गांव में उमड़ा संस्कृति का सैलाब

                             

बागेश्वर/कांडा।

पहाड़ के गांवों से लगातार हो रहे पलायन के बीच बागेश्वर जिले के कांडा क्षेत्र स्थित पोखरी गांव में आयोजित ‘म्यूजिकल Villlage फेस्टिवल’ लोगों के आकर्षण का केंद्र बन गया। गांव को फिर से जीवंत बनाने और पहाड़ की लोक संस्कृति को नई पहचान दिलाने के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यक्रम में स्थानीय ग्रामीणों के साथ-साथ दूर-दराज से आए लोगों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

यह आयोजन यूकेडी नेता वरुण चंदोला की पहल पर किया गया, जिसमें पूरे गांव को दुल्हन की तरह सजाया गया। रंग-बिरंगे घर, पारंपरिक चित्रकारी और संगीत थीम पर आधारित सजावट ने गांव को एक जीवंत सांस्कृतिक मंच में बदल दिया।


फेस्टिवल की खास बातें

  • गांव को संगीत और लोक संस्कृति की थीम पर सजाया गया।
  • हर घर को रंगों और पारंपरिक कला से आकर्षक रूप दिया गया।
  • कुमाऊं और गढ़वाल की लोक कला, संगीत और संस्कृति को मंच मिला।
  • बड़ी संख्या में ग्रामीणों और पर्यटकों ने कार्यक्रम में भाग लिया।
  • सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और कलाकारों की मौजूदगी ने आकर्षण बढ़ाया।

इन हस्तियों ने बढ़ाई कार्यक्रम की रौनक

फेस्टिवल में कई चर्चित कलाकार और सोशल मीडिया हस्तियां शामिल हुईं, जिनमें—

  • हल्द्वानी की आंटी
  • साइकिलिस्ट प्रदीप राणा
  • लोक गायक पूरन राठौर
  • बागनाथ लोक कला मंच के कलाकार
  • कई सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स

ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों का दिल जीत लिया।


मुख्य अतिथि भी रहे मौजूद

कार्यक्रम में यूकेडी नेता आशीष नेगी और पूर्व विधायक पुष्पेश त्रिपाठी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।


‘गांवों को फिर से पहचान दिलाना हमारा उद्देश्य’ — वरुण चंदोला

आयोजक वरुण चंदोला ने कहा कि यह आयोजन केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि पहाड़ के खाली होते गांवों को दोबारा जीवंत करने की एक कोशिश है।

उन्होंने कहा कि पहाड़ की बाखलियों, पारंपरिक घरों और लोक संस्कृति को देश-दुनिया के सामने लाना बेहद जरूरी है। जब बाहरी लोग गांवों में आएंगे और यहां की संस्कृति को समझेंगे, तो गांवों के प्रति नई सोच विकसित होगी।


गांव और शहर के बीच बना सांस्कृतिक सेतु

चंदोला ने बताया कि इस तरह के आयोजनों से—

  • बाहरी लोगों को पहाड़ी जीवन को करीब से समझने का मौका मिलता है।
  • गांव के लोगों को नई सोच और नए लोगों से जुड़ने का अवसर मिलता है।
  • संस्कृति और पर्यटन के जरिए रोजगार की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
  • पलायन रोकने में मदद मिल सकती है।

उन्होंने भविष्य में ऐसे आयोजन अन्य गांवों में भी करने की बात कही।

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