अल्मोड़ा। मानसून के दौरान संभावित प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने गुरुवार को पूरे जिले में व्यापक स्तर पर मॉक ड्रिल आयोजित कर अपनी तैयारियों का परीक्षण किया। छह अलग-अलग स्थानों पर बादल फटना, भूस्खलन, बस दुर्घटना और भीड़ प्रबंधन जैसी काल्पनिक आपदा स्थितियां बनाकर राहत एवं बचाव कार्यों का अभ्यास किया गया। इस दौरान पुलिस, एसडीआरएफ, स्वास्थ्य, अग्निशमन, राजस्व समेत कई विभागों ने संयुक्त रूप से त्वरित कार्रवाई का प्रदर्शन किया।
जिलाधिकारी अंशुल सिंह के निर्देशन में आयोजित इस मॉक ड्रिल का उद्देश्य मानसून के दौरान संभावित आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय, संसाधनों की उपलब्धता और आपदा प्रतिक्रिया तंत्र की कार्यक्षमता को परखना था।
मॉक ड्रिल के तहत रानीखेत की इंदिरा बस्ती में भूस्खलन, द्वाराहाट के सलना गांव और लमगड़ा विकासखंड के कनरा गांव में बादल फटने, सल्ट क्षेत्र में बस दुर्घटना, जागेश्वर धाम में भीड़ प्रबंधन तथा क्वारब क्षेत्र में भूस्खलन की काल्पनिक परिस्थितियां तैयार की गईं। इन सभी स्थानों पर राहत एवं बचाव दलों ने घायलों को सुरक्षित निकालने, प्राथमिक उपचार देने, अस्पताल पहुंचाने और प्रभावित क्षेत्रों को सुरक्षित करने का सफल अभ्यास किया।
क्वारब क्षेत्र की मॉक ड्रिल के लिए पुलिस लाइन में स्टेजिंग एरिया बनाया गया, जहां से राहत एवं बचाव दलों, उपकरणों और संसाधनों का संचालन एवं समन्वय किया गया। वहीं कलेक्ट्रेट स्थित जिला आपदा परिचालन केंद्र में इंसिडेंट रिस्पांस सिस्टम (आईआरएस) के तहत नामित अधिकारी मौजूद रहे। यहां से सभी घटनास्थलों की लगातार निगरानी की गई और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए।
जिलाधिकारी अंशुल सिंह ने कहा कि मानसून के दौरान किसी भी आपदा की स्थिति में त्वरित और समन्वित कार्रवाई ही जन-धन की हानि को कम कर सकती है। उन्होंने बताया कि इस मॉक ड्रिल का उद्देश्य विभागों की तैयारियों का आकलन करना, कमियों की पहचान कर उन्हें दूर करना और वास्तविक आपदा की स्थिति में प्रभावी राहत एवं बचाव सुनिश्चित करना है। साथ ही सभी विभागों को मानसून अवधि में पूरी सतर्कता और बेहतर समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए गए।